Thursday, March 31, 2011
संवेदनशून्य
Wednesday, March 30, 2011
कुछ पढ़ा था
१-- "बनवारी की बिटिया को जॉब मिल गया है । गाँव में ये समाचार सबके मुंह पर है। '२५-३० हज़ार प्रति माह कमाती है' -गाँव की औरतें कहा करती थी। एक अच्छे होटल में उसकी ड्यूटी भी कम टाइम की थी और वेतन भी अच्छा था । ऐसा वेतन कि उसने अपने देहाती माँ-बाप को शहरी बना दिया था। कुछ दिन बाद होटल की लड़कियों को पुलिस रेड में गिरफ्तार किया गया। उनमे बनवारी की बिटिया भी थी। खबर पाकर बनवारी भी थाने पहुंचा और पूछा -"मेरी बिटिया को क्यों गिरफ्तार किया गया?''
थानेदार ने कुछ आपत्तिजनक तस्वीरें बनवारी के सामने पटकते हुए कहा -''तुम्हारी बिटिया की इस करतूत की वजह से।'' वह चुप रह गया। अब गाँव में सब कहते हैं-''तो ये था इतना ऊंचा जॉब.''
२-- गंगाराम कि फसलें सूखती जा रही थी । उसके साथ सभी किसानों ने ईश्वर से प्रार्थना की -''हे प्रभु! हमारी फसलें सूखती जा रही हैं , बरसात करा दे तो बात बन जाये।'' ईश्वर ने उनकी नहीं सुनी। बरसात नहीं हुई । सभी ने पैसे खर्च करके सिंचाई करवाई । फसलें तैयार हुईं और काट कर खलिहानों में पहुंचाई गयीं। सबका अनाज खलिहानों में ही पड़ा था। अब क्या था बरसात हुई-घनघोर और मूसलाधार।
Monday, March 14, 2011
प्रदूषण

प्रदूषण शब्द बना है। जीवन के लिए हानिकारक असामान्य प्राकृतिक अवस्था या परिस्थिति प्रदूषण कहलाता है। प्रदूषण कई तरह का होता है। उदहारण के लिए जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण। मानव द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का अनुचित दोहन प्रदूषण का मुख्य कारण है। द्रुत गति से आधुनिकीकरण प्रदूषण को बढावा दे रहा हैजब जहरीले पदार्थ, झीलों, झरनों, नदियों, सागरों तथा अन्य जलाशयों में जाते हैं तो या तो घुल जाते हैं या तैरते रहते हैं या नीचे तलहटी में बैठ जाते हैं। इससे पानी प्रदूषित हो जाता है, उसकी गुणता घट जाती है, जलीय पर्यावरण को प्रभावित करती है। प्रदूषक नीचे भूतल में जाकर भी जल को प्रदूषित कर देते हैं।शोर एक अनचाही ध्वनि है। जो ध्वनि कुछ को अच्छी लगती है वही दूसरों को नापसन्द हो सकती है। यह विभिन्न घटकों पर आधारित होती है। प्राकृतिक वातावरण हवा, ज्वालामुखी, समुद्री जानवरों, पक्षियों की स्वीकार युक्त आवाजों से भरा होता है। मनुष्य द्वारा निर्मित ध्वनियों में मषीन, कारें, रेलगाड़ियाँ, हवाई जहाज, पटाखे, विस्फोटक आदि शामिल हैं। जो कि ज्यादा विवादित हैं। दोनों तरह के ध्वनि प्रदूषण, नींद, सुनना, संवाद यहाँ तक शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं।
प्रदूषण की एक परिभाषा यह भी हो सकती है कि ''पर्यावरण प्रदूषण उस स्थिति को कहते हैं जब मानव द्वारा पर्यावरण में अवांछित तत्वों एवं ऊर्जा का उस सीमा तक संग्रहण हो जो कि पारिस्थितिकी तंत्र द्वारा आत्मसात न किये जा सकें।'' वायु में हानिकारक पदार्थों को छोड़ने से वायु प्रदूषित हो जाती है। यह स्वास्थ्य समस्या पैदा करती है तथा पर्यावरण एवं सम्पत्ति को नुकसान पहुँचाती है। इससे ओजोन पर्त में बदलाव आया है जिससे मौसम में परिवर्तन हो गया है।
Monday, January 3, 2011
justaju

Wednesday, December 29, 2010
एक कहावत

Saturday, December 11, 2010
दोषी कौन?
आज इसके एकदम विपरीत है । आज शिक्षक कीजो छवि उभर कर आती है उसमे शिक्षक आक्रामक और उद्दंड है। छात्रों द्वारा शिक्षकों के साथ दुर्वयवहार की घटनाएँ , शिक्षको द्वारा की जाने वाली हड़ताल और प्रशासकों से किये जाने वाले व्यवहार शिक्षकों के किन नैतिक मूल्यों का बखान करते हैं? शिक्षको के सम्मान में निरंतर गिरावट आ रही है , इसका दोषी कौन ? ये एक प्रश्न है जो मैं आप के सामने रख रहा हूँ। आप के जवाब के इंतज़ार में............
Saturday, July 31, 2010
मैं ऐसा क्यों हूँ
क्यों खुश हो जाता हूँ मैं
तुम्हारी ख़ुशी देख कर
क्यों हो जाता हूँ मैं हताश
तुम्हें उदास देखकर
चहक सा उठता हूँ मैं क्यों
जब मिलने की बारी आती है
पर क्यों मिलने के बाद घंटो
नींद नहीं आती है
आँखें बंद करने से क्यों
याद तुम्हारी आती है
पर जब खुलती हैं तब
फिर क्यों तू सामने आती है
आंसू तेरे टपकते हैं तब
क्यों मैं सिसकता हूँ
ज़रा सी तू हंसती है तब
क्यों मैं निखरता हूँ
जब भी देखता हूँ तुम्हे
बस यही सोचता हूँ
पूछूं तुमसे या दिल में रखूं ये बात
सुन ज़रा बस इतना बता
मैं ऐसा क्यों हूँ!
मैं ऐसा क्यों हूँ!.........
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Saturday, July 17, 2010
पहचान
निदा फाजली
नहीं, यह भी नहीं
यह भी नहीं यह भी नहीं,
वह तो न जाने कौन थे
ये सब के सब तो मेरे जैसे हैं
सभी की धड़कनों में नन्हे नन्हे चांद रोशन हैं
सभी मेरी तरह वक़्त की भट्टी के ईंधन हैं
जिन्होंने मेरी कुटिया में अंधेरी रात में घुस कर
मेरी आंखों के आगे
मेरे बच्चों को जलाया था
वह तो कोई और थे
वह चेहरे तो कहाँ अब ज़ेहन में महफूज़ जज साहब
मगर हाँ पास हो तो सूँघ कर पहचान सकती हूँ
वो उस जंगल से आये थे
जहाँ की औरतो की गोद में
Friday, July 16, 2010
दुनिया

निदा फाजली
जितनी बुरी कही जाती है उतनी बुरी नहीं है दुनिया
बच्चों के स्कूल में शायद तुमसे मिली नहीं है दुनिया
चार घरों के एक मोहल्ले के बाहर भी है आबादी
जैसी तुम्हे दिखाई दी है , सब की वही नहीं है दुनिया
घर में ही मत उसे सजाओ, इधर-उधर भी ले के जाओ
यूँ लगता है जैसे तुमसे अब तक खुली नहीं है दुनिया
भाग रही है गेंद के पीछे, जाग रही है चाँद के नीचे
शोर भरे नारों से अब तक घबरायी नहीं है दुनिया !!!
Wednesday, July 14, 2010
ग्रुप स्टडी के फायदे



